लंंबा सफर कर आए विदेशी पक्षी; बार हेडिड गीज, चिफचेफ, रूडी प्रजाति का मार्च तक यही ठिकाना

पौंग डैम में विदेशी मेहमानों का आना शुरू हो गया है।


हजारों की तादाद में विदेशी पक्षी डैम के आसपास डेरा डाल चुके हैं।


इनकी चहचहाहट से इलाका चहक रहा है।



साइबेरिया सहित अन्य देशों में जब तालाबों का पानी जम जाता है, तो ये पक्षी सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर भारत में आते हैं। जब यहां गर्मी शुरू होती है तो यह दोबारा अपने वतन को वापस लौट जाते हैं। देश में सर्दी का मौसम शुरू होते ही विदेशी पक्षियों का रुख भी यहां हो चुका है। साइबेरिया और अफगानिस्तान में ठंड ज्यादा होने पर पक्षी हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर भारत आने लगे हैं। मार्च तक बांध में पक्षियों की लगभग 103 प्रजातियां आती हैं।


साल 2017-18 में 62 प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों की संख्या 110203 लाख रही थी। वेटलैंड में हर बार नए प्रवासी पक्षी आते हैं। दुनिया की सबसे सुंदर वेटलैंड में शुमार पौंग झील सेंट्रल एशिया के पक्षियों की पहली पसंद है। साइबेरिया से लेकर अफगानिस्तान तक के पक्षी सर्दियों में पौंग झील में आते हैं। विश्व के 60 फीसदी बारहेडिड गीज (हंस) भी यहां पहुंचेंगे।


पौंग झील में पहुंचने वाले पक्षियों में हंस प्रजाति के बार हेडिड गीज सहित कामनटील, नार्दन पटेल, कॉमनकूट, लिटल कोरमोरेंट, चिफचेफ, रुडी, शेल्डक, कामन, पोचार्ड, कमनतीलगडवाल, लिटिल, कोर्मोरेंट, स्पाट्विल, मलार्डबड्र्, युरेशियन टीलमूरहेन ग्रेट इग्रेट पक्षी प्रमुख हैं।